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Saturday, 2 July 2016

छोटी कहानिया जो बदल दे आपका जीवन



काला बिंदु  (Black Dot)

कक्षा में अध्यापक ने एक बार अपने सारे विद्यार्थियों को बिना किसी प्रकार की पूर्व सूचना के परीक्षा देने के लिए तैयार रहने  का कहा , बिना किसी तैयारी के प्रश्न पत्र का सामना करने का ख्याल अचंभित कर देने के साथ साथ घबरा देने  के लिए काफी था।  वे कुछ सोचते समझते तब तक  महोदय सभी को प्रश्न पत्र के रूप में एक कोर कागज थमा दिया। 

सभी के लिए बिना किसी प्रश्न के मिला ये प्रश्न पत्र आश्चर्य चकित कर रहा था , उनमे से बहुतो ने उसमे कुछ न होने पर सवाल उठाये , अध्यापक ने इशारा किया जो कुछ भी है उसी में है , और आपको जो देखो उसके बारे में लिखना है ,यही आपकी परीक्षा है,  साथ ही सर ने एक निश्चित समय सीमा भी बता दी। 

उस  सफ़ेद कोरे कागज पर सिर्फ एक काला बिंदु था , सब उसको देख उस पेज को उलट पुलट कर उस गुत्थी को सुलझाने की चेष्टा करते रहे।   ये उनके लिए एक विचित्र प्रकार की परीक्षा थी , अतंतः बहुत कोशिश के बाद भी हल नहीं निकल पाया  और इसी के साथ  समय  सीमा भी समाप्त हो गयी।  अध्यापक महोदय ने सभी पत्रों को एकत्रित करना शुरू किया और उसके बाद सबसे उस पत्र सवाल पूछना शुरू किये। 

किसी ने कहा एक काला बिंदु मध्य में है , किसी के लिए वो थोड़ा एक तरफ था और किसी के लिए नीचे की तरफ, लगभग हर किसी ने कुछ ऐसा ही जवाब दिया ,सबके जवाब सुन कर अध्यापक महोदय मुस्कुराते रहे और सबको बैठ जाने का इशारा किया। 

अब उनकी बारी थी , उन्होंने कहा , ये परीक्षा दरअसल एक सीख थी आप सभी के लिए , ये प्रश्न पत्र बिलकुल हमारे जीवन की तरफ था ,  जैसा की सबने देखा सफ़ेद कोरे कागज पर एक काला  बिंदु था, ठीक हमारे जीवन की तरह जिस में बहुत सी खुशियों के बीच कुछ दुःख होते है , परन्तु हमारा ध्यान सिर्फ उस दुःख की तरफ होता है, कोई पैसो की कमी के बारे में या कोई स्वास्थ्य समस्या के बारे , आप में से कसी ने भी कोरे सफ़ेद हिस्से के बारे में कुछ नहीं कहा।  

जीवन को बहुत अच्छे से जीने के लिए आवश्यक है की हमारी सोच सकारात्मक हो और हम सिर्फ दुःख, परेशानियों और अवरोधों की तरफ न देख , खुशियों , सफलता और जो ईश्वर से मिला है उसे भी देखे और उसका पूरा आनंद ले , तो शायद हमारा जीवन और अधिक सुखी हो सकता है।  

बदले अपना दृष्टिकोण 

एक बार किसी शहर में बहुत धनी व्यक्ति रहा करता था , वो अपनी आँखों के दर्द से बहुत परेशान था , वो उस बीमारी के इलाज के लिए बहतु से चिकित्सकों , वैद्यो और न जाने किस किस से दवाई ले चूका था , उसका ये सिलसिला रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था , पता नहीं कितना धन उसकी इस बीमारी पर खर्च हो चूका था।  परन्तु फिर भी हर बार उसका दर्द पहले से  बढ़ते ही  जा रहा था।  

तभी उसे तक संत के बारे में पता चला जो इस इस प्रकार की लाइलाज बीमारियों को ठीक करते थे , उन्हें महल में   बुलवाया गया , उन्होंने उस धनी व्यक्ति को कहा की उनकी ये बीमारी ठीक हो सकती है अगर वे सिर्फ हरा रंग देखे , उनकी आँखों को और कोई भी रंग नहीं दिखना चाहिए।  ये एक विचित्र तरीका था पर कोई दूसरा इलाज भी नहीं था।  शहर भर के रंग का काम करने वालो को बुलवाया गया, सब  हरे रंग से पुतवा दिया गया, दिवार , दरवाजे और वो सब जो सब जिस पर भी नजर जाती।  

कुछ दिनों बाद वो संत फिर नगर में आये , करोड़पति सेठ ने उन्हें घर बुलवाया , उनके ऊपर सेठजी की नजर पड़ती उसके पहले उनके लोग संत की तरफ हरा रंग ले कर उनके कपड़ो को रंगने पहुंचे , क्योंकि उन्होंने लाल रंग के वस्त्र पहने थे।  

ये देख कर महात्मा जी जोर से हंसे और कहा की सब तरफ रंग लगने के बजाये तुम अपनी आँख पर हरा चश्मा भी तो लगा सकते थे दुनिया को बदलने की कोशिश बेकार है , बस अपना  दुनिया को देखने का अपना दृष्टिकोण (नजरिया) बदल लो।  

जादुई राई के दाने

पुराने चीन में प्रचलित कहानी के अनुसार एक बार एक महिला के जवान बेटे की मृत्यु हो गयी , उसकी मौत से दुखी हो कर वो उसे वापिस लाने  के प्रयास करने लगी।  इसी सन्दर्भ में उसकी मुलाकात एक पहुंचे हुए संत से हुई।  उस महिला ने उनसे अपने पुत्र की मौत की बात की और कहा की किया आप उसे अपनी प्रार्थनाओं और और पूजा से वापिस ला सकते है। 

उस संत ने किसी प्रकार से उसे समझा कर वापिस रवाना करने के बजाये उसे कहा की मुझे तुम कुछ राई दाने  ला कर दो , मैं उनसे तुम्हारे जीवन का दुःख दूर कर दूंगा , बस इतना ध्यान रखना वो ऐसे घर से ला कर देना जिस घर में किसी ने दुःख न देखा हो।  ये सुन कर वो महिला वंहा से रवाना हो गयी , जादुई राई के दाने लेने के लिए। 

सबसे पहले उसने एक बड़े महलनुमा घर का दरवाजा खटखटाया और बताया की मैं राई के कुछ दाने चाहती हु परन्तु सिर्फ ऐसे घर से जंहा कोई मौत ना हुई हो , कृपया मेरी मदद करे।  ये सुन कर वंहा से उसे बताया की कुछ ही दिनों पहले उनके साथ कोई दुखद हादसा हुआ ,और फिर उन्होंने  पूरा किस्सा सुनाया।  उस महिला ने आगे जाने के बजाये उनके साथ दुःख प्रकट किया और  कुछ देर रुक कर उन्हें सांत्वना प्रदान की। 

उसके बाद वो आगे उस घर की तलाश में आगे बढ़ गयी जिस घर ने  कोई दुःख न देखा हो , परन्तु उसकी ये तलाश असफल रही क्योंकि वो जंहा जाती उस घर ने  कोई न कोई मृत्यु देखि थी।  इस तरह से वो हर किसी का दुःख बांटते हुए आगे बढ़ती रही और अपना दुःख भूलती गयी।  

इस तरह से सबकी मदद करते करते और अपना दुःख भूल गयी , तब उसे समझ आया की किस तरह से राई के जादुई दानो ने उसका दुःख ख़त्म  किया। 

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दुःख , अवरोध और परेशानियां जीवन का अंग है ,  कोई भी इन से बच न सका, इन लघु कथाओ को पढ़ कर सीख मिलती है जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण होना बहुत जरुरी है , तभी समस्याएं और दुःख हम पर हावी नहीं हो पाएंगे , अतः आवश्यक है की हम उन खुशियों पर ध्यान दे जो ईश्वर ने हमें दी , उन दुखो पर नहीं जो हमें प्रताड़ित करते है। 



Sunday, 12 June 2016

बहती नदी - A Beautiful Story



एक संत बहुत दिनों से नदी के किनारे बैठे  थे, एक दिन किसी व्यकि ने उससे पुछा आप नदी के किनारे बैठे-बैठे क्या कर रहे हैं.?  संत ने कहा, इस नदी का जल पूरा का पूरा बह जाए इसका इंतजार कर रहा हूँ।

व्यक्ति ने कहा  यह कैसे हो सकता है। नदी तो बहती ही रहती है सारा पानी अगर बह भी जाए तो, आप को क्या करना.?
संत ने कहा मुझे दुसरे पार जाना है,  सारा जल बह जाए, तो मैं चल कर उस पार जाऊँगा।उस व्यक्ति ने गुस्से में कहा: आप पागल नासमझ जैसी बात कर रहे हैं, ऐसा तो हो ही नही सकता। 

तब संत ने मुस्कराते हुए कहा : यह काम तुम लोगों को देख कर ही सीखा  है। तुम लोग हमेशा सोचते रहते हो कि जीवन मे थोड़ी बाधाएं कम हो जाएं, कुछ शांति मिले, फलाना काम खत्म हो जाए तो  भगवान के दर्शन करू, उस तीर्थ के दर्शन करू, बच्चा बढ़ा हो नए तो ऐसा कुछ करूँगा , तब कोई यात्रा करूँगा , नौकरी में तरक्की मिल जाये तब मित्रो के साथ आनंद करूँगा और भी पता नहीं कैसी कैसी अनंत इच्छाये है तुम्हारी।

सुख के पल के लिए प्रतीक्षा मत करो जिस पल में जी रहे हों वो पल कुछ भी करने के लिए सर्वश्रेष्ठ है, जो है उसमे जी लो तो आने वाला समय और अधिक उत्तम होगा उसको और अच्छे से जी लेना । जीवन भी तो नदी के समान है यदि जीवन मे तुम यह आशा लगाए बैठे हो, तो मैं इस नदी के पानी के पूरे बह जाने का इंतजार क्यों न करूँ..?

अभी भी वक्त है, सद्कर्म से जुडो , ईश्वर की तुम पर पूरी नजर है सब कुछ होते हुए भी तुम लालच में अंधे होते हो तो उसको दुःख होता है, तुम हंसते हो जीवन का हर सुख सबसे बांटते हो, संतुष्टि और  आनंद से रहते हो तो ईश्वर प्रसन्न होता है।  भाग्यशाली वो नहीं होते जिन्हें  जीवन में सब अच्छा मिलता है, भाग्यशाली वो होते है जो जीवन में जो मिला है उसका आनंद उठाते है।

उसका नाम लेते चलो और आनंद से जीवन को जीते चलो क्योंकि ये नदी तो बहती जा रही है अनंत सागर की तरफ। 

जय श्री कृष्णा

Saturday, 11 June 2016

बांस का पेड़ - A Motivational Story



बाँस का पेड़



एक संत अपने शिष्य के साथ जंगल में जा रहे थे। ढलान पर से गुजरते अचानक शिष्य का पैर फिसला और वह तेजी से नीचे की ओर लुढ़कने लगा।वह खाई में गिरने ही वाला था कि तभी उसके हाथ में बांस का एक पौधा आ गया। उसने बांस के पौधे को मजबूती से पकड़ लिया और वह खाई में गिरने से बच गया।

बांस धनुष की तरह मुड़ गया लेकिन न तो वह जमीन से उखड़ा और न ही टूटा. वह बांस को मजबूती से पकड़कर लटका रहा। थोड़ी देर बाद उसके गुरू पहुंचे।उन्होंने हाथ का सहारा देकर शिष्य को ऊपर खींच लिया। दोनों अपने रास्ते पर आगे बढ़ चले।  राह में संत ने शिष्य से कहा- जान बचाने वाले बांस ने तुमसे कुछ कहा, तुमने सुना क्या? शिष्य ने कहा- नहीं गुरुजी, शायद प्राण संकट में थे इसलिए मैंने ध्यान नहीं दिया और मुझे तो पेड-पौधों की भाषा भी नहीं आती. आप ही बता दीजिए उसका संदेश।

गुरु मुस्कुराए- खाई में गिरते समय तुमने जिस बांस को पकड़ लिया था, वह पूरी तरह मुड़ गया था। फिर भी उसने तुम्हें सहारा दिया और जान बची ली। संत ने बात आगे बढ़ाई- बांस ने तुम्हारे लिए जो संदेश दिया वह मैं तुम्हें दिखाता हूं।
गुरू ने रास्ते में खड़े बांस के एक पौधे को खींचा औऱ फिर छोड़ दिया। बांस लचककर अपनी जगह पर वापस लौट गया। हमें बांस की इसी लचीलेपन की खूबी को अपनाना चाहिए। तेज हवाएं बांसों के झुरमुट को झकझोर कर उखाड़ने की कोशिश करती हैं लेकिन वह आगे-पीछे डोलता मजबूती से धरती में जमा रहता है।

बांस ने तुम्हारे लिए यही संदेश भेजा है कि जीवन में जब भी मुश्किल दौर आए तो थोड़ा झुककर विनम्र बन जाना लेकिन टूटना नहीं क्योंकि बुरा दौर निकलते ही पुन: अपनी स्थिति में दोबारा पहुंच सकते हो।

शिष्य बड़े गौर से सुनता रहा। गुरु ने आगे कहा- बांस न केवल हर तनाव को झेल जाता है बल्कि यह उस तनाव को अपनी शक्ति बना लेता है और दुगनी गति से ऊपर उठता है। बांस ने कहा कि तुम अपने जीवन में इसी तरह लचीले बने रहना। गुरू ने शिष्य को कहा- पुत्र पेड़-पौधों की भाषा मुझे भी नहीं आती। बेजुबान प्राणी हमें अपने
आचरण से बहुत कुछ सिखाते हैं।
जरा सोचिए कितनी बड़ी बात है। हमें सीखने के सबसे ज्यादा अवसर उनसे मिलते हैं जो अपने प्रवचन से नहीं बल्कि कर्म से हमें लाख टके की बात सिखाते हैं।

हम नहीं पहचान पाते, तो यह कमी हमारी है।
जीवन” में “तकलीफ़” उसी को आती है…जो हमेशा “जिम्मेदारी” उठाने को तैयार रहते है…

और …
जिम्मेदारी लेने वाले कभी हारते नही, या तो “जीतते” है, या फिर “सीखते” है…

जय श्री कृष्ण