किसी ने कितनी अच्छी बात कही की जिस व्यक्ति के पहले हवाई जहाज चला करते थे आज उसके पास पासपोर्ट भी नहीं है , ये व्यक्ति की शख्सियत हमेशा इतनी चर्चित और प्रसिद्ध रही की जिसने रईसी शानो शौकत में नवाबों को पीछे छोड़ दिया , विजय माल्या (Vijay Mallya ), ये नाम सिर्फ उद्योग जगत या राजनितिक क्षेत्र तक ही सिमित नहीं रहा , इनके नाम की चमक ने बॉलीवुड (Bollywood ) और खेल की दुनिया के सितारों से बराबरी की , इनकी महफ़िलो का इतना नाम की सितारे भी उनमे शामिल होकर अपने आप को किस्मत वाले समझते थे।Click to visit my facebook page
कभी शराब की दुनिया के कभी बेताज बादशाह (Liquor King) कहलाने वाले विजय माल्या (Vijay Mallya) को सितारों ने जबरदस्त ऊंचाई दी और फिर ऐसा खेल भी खेला की आज वो भगौड़ों की तरह भागते फिर रहे है।
क्या है उनकी कुंडली (horoscope) में जिसने उन्हें इतनी ऊंचाई दी ?
विजय माल्या का जन्म कुम्भ (Aquarius) लग्न में हुआ है , जिसके स्वामी ग्रह शनि (#shani) दशम भाव (10th house ) में विराजित है, यंहा लग्न स्वयम (self ) का प्रतिनिधित्व करता है तो दशम भाव कर्म क्षेत्र (profession ) का , ये योग कर्म क्षेत्र में सफलता के लिए बहुत ही उत्तम है और व्यक्ति को मजबूत पहचान के साथ कार्य क्षेत्र में ऊंचाई देता है, परन्तु साथ ही ध्यान रखने योग ये है की दशम भाव में राशि है वृश्चिक (scorpio) , जो शनि (#shani ) की शत्रु राशि है और स्वाभाव से अस्थिर।
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कुम्भ लग्न में जन्मे लोग बहुत ही गहरी और व्यवहारिक (practical ) सोच वाले लोग होते है , स्वभाव में धैर्य रख, परिस्थितियों को भांप कर अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरी करने में इनका कोई सानी नहीं। ये अत्यधिक ही व्यव्हार कुशल , वाक पटु, आकर्षक छवि वाले और महत्वाकांक्षी होते है ,इस लग्न में गुरु और शुक्र दो महत्व पूर्ण ग्रह होते है , क्योंकि गुरु ग्यारहवे (11th house) और दूसरे भाव (2nd house) के स्वामी होते है , जो क्रमशः आय और संचित धन के भाव है और अगर गुरु की स्थित कुंडली में मजबूत है तो समझिए इस कुंडली में बड़ा धन योग बनता है , ये धन योग और अधिक प्रबल हो जाता है जब वो दूसरे या ग्यारहवे भाव को अपनी शुभ दृष्टि से और अधिक प्रबल करे , जैसा की Vijay Mallya की कुंडली में है , ग्यारहवे भाव में सूर्य , शुक्र और बुध विराजित है (sun ,venus and mercury ) , यहाँ सूर्य , गुरु के घर में (धनु राशि में ) और गुरु , सूर्य के घर में सप्तम भाव में विराजित हो प्रबल परिवर्तन योग (exchange combination ) बना कर धन योग को प्रबल कर रहे है , ये सप्तम भाव trade business (व्यापर ) का भाव भी है और गुरु का यंहा होना व्यापार को आकर्षित करता है।
अन्य महत्वपूर्ण ग्रह शुक्र भाग्य स्थान ( 9th house ) और सुख -सम्पती -वैभव (4th house ) का स्वामी ग्रह है और उस पर गुरु दृष्टि है अर्थात भाग्य और अधिक मजबूत हुआ , इस मजबूती ने न सिर्फ व्यापार और धन को आकर्षित किया बल्कि तरक्की के अवसर भी उपलब्ध करवाए , इसी योग की वजह से शासन तंत्र की भरपूर सहायता मिली और वे सांसद जैसे महत्वपूर्ण पद को भी प्राप्त कर पाए। इसी शुक्र पर गुरु (#jupiter ) की दृष्टि ने उन्हें राजसी जीवन (Royal life ) की सुख सुविधा और बहुत सी संपत्तिया भी उपलब्ध करवाई।
शुक्र और सूर्य के साथ वंहा बैठा बुध जो की पंचम भाव का स्वामी है (power and position ) और उसकी पंचम भाव पर दृष्टि तथा बुध पर गुरु की दृष्टि पंचम भाव को भी मजबूत बना रही है। कुल मिला एक गुरु ने बहुत से भावो और ग्रहों को एक साथ दृष्टि दे कर बहुत मजबूत स्थिति में ला दिया एवं उसके फल स्वरुप इन्हे इतना सब मिला।
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दशम (कर्म, profession ) भाव का स्वामी मंगल (mars ) भी भाग्य भाव (fortune ) में बहुत ही मजबूत स्थिति में है वो भी तृतीय (पराक्रम, ) और चतुर्थ भाव को दृष्ट कर प्रबल बना रहा है , 3rd house त्वरित निर्णय, साहस और आत्म विश्वास को मजबूत करता है जिसने बहुत सी कंपनियों को अधिग्रहित करने के निर्णय में भूमिका निभाई , हलाकि इसी (आत्म) विश्वास की अधिकता ने ख़राब समय में kingfisher airlines की नीव रखवाई जो अंततः परेशानी का कारन भी बनी।
जन्म कुंडली में मंगल आत्मकारक ग्रह भी है (atmkarak = planet with 2nd highest longitude) , कुंडली में AK का दशम या नवम भाव से सम्बन्ध होना राजसम्बन्ध योग निर्मित करता है , जिसने अपना काम बखूबी किया।
जन्म कुंडली में मंगल आत्मकारक ग्रह भी है (atmkarak = planet with 2nd highest longitude) , कुंडली में AK का दशम या नवम भाव से सम्बन्ध होना राजसम्बन्ध योग निर्मित करता है , जिसने अपना काम बखूबी किया।
सूर्य और बुध दोनों पास हो व्यवसायिक सफलता के दृष्टिकोण से बहुत अच्छा योग निर्मित कर रहे है , परन्तु दोनों सप्तम (7th ) और अष्टम (8th ) भाव के स्वामी है (यंहा बुध पंचम भाव का स्वामी भी है ) जिनका साथ होना एक से अधिक वैवाहिक सम्बन्धो के टूटने और बनने के लिए उत्तरदायी है।
मार्च-१९८७ से मार्च २००३ तक गुरु की महादशा में माल्या ने बेहिसाब तरक्की की , इसी समय में मंगल की अन्तर्दशा में उन्होंने राजनीती में भी प्रवेश किया , दशम भाव में स्थित शनि के साथ राहु ने उन्हें महत्वकांक्षी बनाया और जैसा की वंहा स्थित अष्टम राशि वृश्चिक का स्वभाव है व्यक्ति दूसरों के धन (कर्ज ) से तरक्की करता है, उन्होंने अपने सम्बन्धो का लाभ और व्यवसायिक चातुर्य से अपनी महत्वाकांक्षा को पूर्ण किया।
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वृश्चिक राशि में आ कर राहु और शनि दोनों ही बहुत अच्छा फल नहीं प्रदान करते , क्योंकि वृश्चिक राशि अचानक बड़े परिवर्तन देने का कार्य भी करती है , शनि सिर्फ लग्न का ही स्वामी नहीं 12th house (बारहवे भाव ) का भी है , नुकसान , खर्च और क़ानूनी दण्ड का प्रतिनिधित्व करता है , दशम भाव में बारहवे भाव के स्वामी की उपस्थिति बड़े पतन का कारन बनती है साथ ही शनि राहु दोनों का साथ होना विशेष कर केंद्र भाव में पूर्व पुण्यो की कमी दर्शाता है , अर्थात ये तो तय है की ऊंचाइयों के साथ साथ परेशानी के योग कुंडली में उपस्थित है, वर्तमान समय में वे शनि की महादशा से गुजर रहे है , इस दशा की शुरुआत (2003 ) से हुई और तभी से वे airlines के व्यापार में आये और परेशानियां शुरू हुई , वर्ष दर वर्ष परेशानियां बढती गयी , मंगल , शनि से बारहवे भाव में है जिसकी अन्तर्दशा अभी चल रही है , ये योग बड़ा ही ख़राब फल प्रदान करता है , फ़िलहाल हासिल किये गए सारे मुकाम हाथ से जा चुके है , यंहा तक की अपने ही देश से बाहर भागना पड़ा , इस समय में जितना भी नुकसान हो वो कम है , इस मंगल के बाद शनि में राहु की अन्तर्दशा होगी जो समस्या को और अधिक बढ़ाएगी। Click to read other blogs
वर्तमान में गोचर का भी शनि कुंडली के दशम भाव (10th house ) से ही भ्रमण कर रहा है जो परिस्थितियों को और अधिक विपरीत कर रहा है, आने वाले समय में साढ़े साती प्रारम्भ होगी , उसका अपना प्रभाव होगा , ये बात और है कुंडली में स्थित अन्य योग स्थितयों को पुनः पक्ष में लाएंगे, पर उस स्थिति तक पहुंचने में बहुत संघर्ष का बहुत समय बाकि है। Click to read other blogs
पंकज उपाध्याय
इंदौर
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